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सौर मंडल में मिला पहला तीन सिर वाला एस्टेरॉयड, वैज्ञानिक भी हैरान

By Nandini Sharma

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वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में एक ऐसी खोज की है जिसने पूरी वैज्ञानिक दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। खगोलविदों ने (44) नाइसा (Nysa) नाम के एक एस्टेरॉयड की पहचान की है, जिसकी बनावट किसी भी पहले देखे गए एस्टेरॉयड से बिल्कुल अलग है। इसकी खास बात यह है कि यह तीन जुड़े हुए हिस्सों (थ्री-लॉब) से बना दिखाई देता है, इसलिए इसे सौर मंडल का पहला “तीन सिर वाला एस्टेरॉयड” कहा जा रहा है।

इस अनोखे एस्टेरॉयड की तस्वीरें अमेरिका के लार्ज बाइनोक्यूलर टेलीस्कोप और चिली के वेरी लार्ज टेलीस्कोप की मदद से ली गईं। ये अब तक की सबसे स्पष्ट तस्वीरें हैं, जिनसे इसकी असामान्य बनावट सामने आई।

यह एस्टेरॉयड मंगल और बृहस्पति के बीच मौजूद मुख्य एस्टेरॉयड बेल्ट में स्थित है और इसका आकार लगभग 74 किलोमीटर है। आमतौर पर एस्टेरॉयड गोल या अनियमित आकार के होते हैं, लेकिन नाइसा तीन चट्टानी हिस्सों के आपस में जुड़े होने जैसा दिखाई देता है।

इस खोज को और भी खास बनाती है इसके चारों ओर चक्कर लगाने वाला एक छोटा चंद्रमा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह चंद्रमा करीब 0.8 किलोमीटर चौड़ा है और एस्टेरॉयड से लगभग 160 किलोमीटर की दूरी पर इसकी परिक्रमा कर रहा है। इसके अध्ययन से वैज्ञानिक एस्टेरॉयड के द्रव्यमान, घनत्व और आंतरिक संरचना को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस अनोखी बनावट के पीछे दो संभावित कारण हो सकते हैं। पहला, अरबों साल पहले तीन अलग-अलग चट्टानी पिंड धीरे-धीरे टकराकर एक साथ जुड़ गए हों। दूसरा, यह किसी बेहद शक्तिशाली प्राचीन टक्कर का बचा हुआ हिस्सा हो सकता है, जिसने इसे आज के इस अनोखे आकार में बदल दिया।

नाइसा पहले से ही अपनी चमकदार सतह के कारण वैज्ञानिकों के बीच जाना जाता है। माना जाता है कि इसमें मौजूद खनिज हमें यह समझने में मदद कर सकते हैं कि पृथ्वी जैसे आंतरिक ग्रहों का निर्माण कैसे हुआ था।

यह खोज एक बार फिर साबित करती है कि आधुनिक टेलीस्कोप अंतरिक्ष के पुराने और परिचित पिंडों में भी नई और चौंकाने वाली जानकारियां खोज सकते हैं। आने वाले समय में वैज्ञानिक नाइसा और उसके छोटे चंद्रमा का और गहराई से अध्ययन करेंगे, जिससे सौर मंडल के शुरुआती इतिहास से जुड़े कई नए रहस्यों से पर्दा उठ सकता है।

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