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भारत में खुलेंगे विशेष वाउंड केयर सेंटर, AI तकनीक से होगी मरीजों की निगरानी

By Nandini Sharma

Updated on:

India Set to Get Dedicated Centres of Excellence for Chronic and Non-Healing Wounds
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भारत में डायबिटीज और उससे जुड़ी जटिलताओं के बढ़ते मामलों के बीच मरीजों को बेहतर इलाज देने के लिए एक बड़ी पहल शुरू की जा रही है। आने वाले दो से तीन वर्षों में देशभर में विशेष वाउंड केयर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जहां पुराने और लंबे समय तक न भरने वाले घावों का आधुनिक तकनीक की मदद से इलाज किया जाएगा।

इन सेंटरों को IHLD MedTech की “Wound Heal Plus” पहल के तहत विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना को सिंगापुर की कंपनी UltraGreen.ai से शुरुआती तौर पर 30 लाख डॉलर (करीब 25 करोड़ रुपये) का निवेश मिला है।

भविष्य में यह निवेश बढ़कर 12 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

IHLD MedTech का कहना है कि इन केंद्रों में मरीजों को घावों की जांच, एडवांस्ड इमेजिंग, उपचार, पुनर्वास और इलाज के बाद लगातार निगरानी जैसी सुविधाएं एक ही छत के नीचे मिलेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में घावों की देखभाल और इलाज को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, जबकि लाखों लोग इससे प्रभावित हैं।

कंपनी के संस्थापक और हृदय एवं रक्तवाहिका सर्जन डॉ. राहुल चंदोला के अनुसार, भारत में बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। इनमें से कई मरीजों को नसों की कमजोरी और रक्त संचार की समस्याओं के कारण डायबिटिक फुट अल्सर जैसी गंभीर समस्याएं हो जाती हैं।

समय पर इलाज न मिलने पर कई मामलों में अंग काटने तक की नौबत आ सकती है।

इन नए सेंटरों में वैस्कुलर सर्जन, प्लास्टिक सर्जन, पोडियाट्रिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और पुनर्वास विशेषज्ञ मिलकर मरीजों का इलाज करेंगे।

खास बात यह है कि यहां एडवांस्ड फ्लोरोसेंस इमेजिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे डॉक्टर घाव के अंदर रक्त प्रवाह और ऊतकों की स्थिति का सटीक आकलन कर सकेंगे।

इसके अलावा कंपनी iLiveConnect नाम का एक AI-आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विस्तार दे रही है। यह प्लेटफॉर्म मरीजों को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी डॉक्टरों से जोड़े रखेगा।

इसमें वेयरेबल सेंसर, स्मार्ट हेल्थ पैच, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और रियल-टाइम डॉक्टर मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

इस तकनीक की मदद से मरीज की स्थिति बिगड़ने के शुरुआती संकेतों को पहले ही पहचाना जा सकेगा, जिससे समय रहते इलाज शुरू किया जा सके। कंपनी का मानना है कि भविष्य में स्वास्थ्य सेवाएं केवल बीमारी का इलाज करने तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि बीमारी को रोकने और मरीजों की लगातार निगरानी करने पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।

डॉ. राहुल चंदोला ने कहा कि उनका लक्ष्य अगले दो से तीन वर्षों में भारत के विभिन्न शहरों में ऐसे कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करना है। इसके बाद इस मॉडल को मध्य पूर्व, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी ले जाने की योजना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो डायबिटीज और पुराने घावों से जूझ रहे लाखों मरीजों को बेहतर इलाज, समय पर देखभाल और जीवन की बेहतर गुणवत्ता मिल सकेगी।

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