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Flashback 2025: जब हादसों ने देश की खुशियों पर मातम लिख दिया

By admin

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साल 2025 भारत के लिए एक विरोधाभासी साल बनकर सामने आया। एक ओर विकास, तकनीक और उपलब्धियों की बातें हुईं, वहीं दूसरी ओर हादसों की एक के बाद एक घटनाओं ने देश को झकझोर कर रख दिया। कहीं आस्था की भीड़ जानलेवा साबित हुई, कहीं जश्न मातम में बदल गया और कहीं लापरवाही व तकनीकी खामियों ने सैकड़ों घरों को उजाड़ दिया।


जून: जब हादसे काल बनकर आए

2025 का जून महीना सबसे ज्यादा भयावह साबित हुआ।
12 जून को अहमदाबाद में एयर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान हादसे का शिकार हो गया। इस दुर्घटना में 260 लोगों की जान चली गई, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। विमान के मेडिकल कॉलेज हॉस्टल पर गिरने से ज़मीन पर मौजूद लोग भी इसकी चपेट में आए।

9 जून को मुंबई लोकल ट्रेनों की भीड़ ने एक बार फिर जान ली। मुंब्रा के पास अत्यधिक भीड़ के कारण यात्री ट्रेन से गिर पड़े और कम से कम चार लोगों की मौत हो गई।

4 जून को बेंगलुरु में आईपीएल जीत के जश्न के दौरान चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़ मच गई। खुशी के इस पल ने 11 जिंदगियां छीन लीं


आस्था और आयोजनों में मची भगदड़

29 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज महाकुंभ में भगदड़ मचने से 37 श्रद्धालुओं की मौत हो गई।
15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में फैली अफवाह ने भगदड़ को जन्म दिया, जिसमें 18 लोग मारे गए
मई में गोवा के शिरगांव गांव में लैराई जात्रा के दौरान भगदड़ से कई लोगों की जान गई।
सितंबर में तमिलनाडु के करूर में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई।


आग और विस्फोट ने बुझाए कई घरों के चिराग

जून के अंत में तेलंगाना के पाशमेलारम में एक फार्मास्यूटिकल फैक्ट्री में हुए विस्फोट में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
6 दिसंबर को गोवा के एक नाइट क्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली, जबकि कई घायल हुए।


सड़क हादसों की डरावनी तस्वीर

दिसंबर में देश के अलग-अलग हिस्सों में बस हादसों ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में हुए हादसों में 34 से अधिक लोग मारे गए


एक साल, कई सवाल

2025 ने यह सवाल छोड़ दिया कि क्या भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा मानक और जवाबदेही पर अब गंभीरता से काम होगा?
यह साल सिर्फ आंकड़ों में दर्ज हादसों का नहीं, बल्कि उन अधूरी रह गई जिंदगियों का साल बन गया, जिनका दर्द देश लंबे समय तक महसूस करता रहेगा।

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