नई दिल्ली: कैंसर की शुरुआती पहचान और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने बुधवार को तीस हजारी कोर्ट कॉम्प्लेक्स में कैंसर अवेयरनेस, प्रिवेंशन एंड स्क्रीनिंग (CAPS) कैंप का आयोजन किया। इस पहल का मकसद कोर्ट स्टाफ के बीच कैंसर की जांच और समय पर पहचान के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।
इस कार्यक्रम में सुश्री अंजू बजाज चंदना, जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) / चेयरपर्सन, सेंट्रल डीएलएसए, सुश्री अदिति चौधरी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पश्चिम) / चेयरपर्सन, वेस्ट डीएलएसए, श्री अभितेश कुमार, सचिव, सेंट्रल डीएलएसए, श्री संकल्प कपूर, वेस्ट डीएलएसए तथा सुश्री रुचिका सिंगला, जिला न्यायाधीश की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कैंप के दौरान प्रतिभागियों को कई तरह की स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई गईं। इनमें मुफ्त कैंसर स्क्रीनिंग, विशेषज्ञ डॉक्टरों से परामर्श, जागरूकता सत्र, मैमोग्राफी जांच और एचपीवी-डीएनए टेस्ट शामिल थे।
आयोजकों के अनुसार, दोपहर तक 9 महिलाओं की मैमोग्राफी जांच और 27 एचपीवी-डीएनए टेस्ट किए जा चुके थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसी जांचें स्तन और सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यक्रम में महिलाओं को ब्रेस्ट सेल्फ-एग्जामिनेशन यानी स्वयं स्तन जांच करने के तरीके भी बताए गए। विशेषज्ञों ने समझाया कि यदि महिलाएँ नियमित रूप से खुद जांच करें, तो शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचाना जा सकता है।
इस कैंप से एक दिन पहले स्तन और सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग गाइडलाइन तथा एचपीवी वैक्सीनेशन के महत्व पर एक ऑनलाइन जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया था।
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने कहा कि कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने के लिए शुरुआती जांच बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा,
“नियमित स्क्रीनिंग और समय पर जांच ही स्तन और सर्वाइकल कैंसर के खतरे को कम करने के सबसे प्रभावी तरीके हैं। सेल्फ-एग्जामिनेशन, एचपीवी वैक्सीनेशन और स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल का पालन करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं और कई जिंदगियाँ बचाई जा सकती हैं।”
वहीं सुश्री अंजू बजाज चंदना, जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) / चेयरपर्सन, सेंट्रल डीएलएसए ने कहा कि अक्सर लोग डर की वजह से कैंसर की जांच नहीं कराते।
उन्होंने कहा कि कई लोगों के मन में यह डर रहता है कि कहीं उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव न आ जाए।
“‘अगर ऐसा हो गया तो?’ यही डर लोगों को समय पर स्क्रीनिंग कराने से रोक देता है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कैंसर का पता शुरुआती चरण में चल जाए, तो उसका इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है।
CAPS पहल का उद्देश्य समुदाय में कैंसर की रोकथाम के प्रति जागरूकता बढ़ाना, समय पर स्क्रीनिंग को प्रोत्साहित करना और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है।









