नई दिल्ली: देश में बढ़ता वायु प्रदूषण और पराली जलाने की घटनाएं लोगों में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन के खतरे को तेजी से बढ़ा सकती हैं। यह चेतावनी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विशेषज्ञों ने दी है।
AIIMS और IIT दिल्ली द्वारा किए गए अध्ययनों का हवाला देते हुए कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अंबुज रॉय ने कहा कि जिन इलाकों में पराली जलाने से ज्यादा प्रदूषण होता है, वहां लोगों में हाइपरटेंशन के मामले अधिक देखे गए हैं। उन्होंने बताया कि PM2.5 प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी के साथ हाई ब्लड प्रेशर और उससे जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।
डॉ. रॉय ने हाइपरटेंशन को “साइलेंट लेकिन खतरनाक बीमारी” बताते हुए कहा कि भारत में लगभग 30 करोड़ लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हर साल करीब 16 लाख मौतें हाइपरटेंशन से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती हैं।
ICMR और नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार, शहरी भारत में हर तीन में से एक व्यक्ति और ग्रामीण भारत में हर चार में से एक व्यक्ति हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित है। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें हाइपरटेंशन है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते।
विशेषज्ञों का कहना है कि खराब लाइफस्टाइल, तनाव, मोटापा, जंक और प्रोसेस्ड फूड, कम शारीरिक गतिविधि और खराब नींद जैसी आदतें भी इस समस्या को तेजी से बढ़ा रही हैं।
डॉक्टरों ने चिंता जताई कि अब हाइपरटेंशन केवल शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में भी बदलती जीवनशैली और अस्वस्थ खानपान के कारण इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
डॉ. अंबुज रॉय ने सलाह दी कि 25 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को साल में कम से कम एक बार अपना ब्लड प्रेशर जरूर जांचना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना, कम नमक वाला भोजन और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हाई BP को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि गर्मी और हीटवेव के दौरान हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि शरीर में पानी की कमी से BP से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।







