अहमदाबाद: अहमदाबाद सिविल अस्पताल के डॉक्टरों ने एक ढाई साल के बच्चे की दुर्लभ और जटिल सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी है। बच्चा जन्म से प्योर इसोफेगल एट्रेसिया (Pure Oesophageal Atresia) नाम की एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित था, जिसके कारण उसकी भोजन नली (Food Pipe/Oesophagus) पूरी तरह विकसित नहीं हुई थी। इस वजह से वह जन्म के बाद से मुंह से दूध या खाना नहीं खा सकता था। सफल सर्जरी के बाद अब वह पहली बार सामान्य तरीके से मुंह के रास्ते खाना खाने लगा है।
अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, यह उपलब्धि पीडियाट्रिक सर्जरी (Paediatric Surgery) विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है। यह जटिल जन्मजात बीमारियों के इलाज में अस्पताल की विशेषज्ञता और आधुनिक सर्जिकल क्षमता को भी दर्शाती है।
क्या है प्योर इसोफेगल एट्रेसिया?
बच्चे मंतव्य, जो अहमदाबाद जिले के साणंद निवासी शैलेष पटेल के पुत्र हैं, का जन्म 7 नवंबर 2023 को हुआ था। जन्म के समय उनमें प्योर इसोफेगल एट्रेसिया (Pure Oesophageal Atresia) पाया गया। यह एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी है, जिसमें भोजन नली के दोनों सिरे आपस में जुड़े नहीं होते और उनके बीच काफी दूरी होती है। इस कारण बच्चा जन्म से ही मुंह के रास्ते दूध या भोजन निगल नहीं सकता था।
जन्म के दूसरे दिन करनी पड़ी जीवनरक्षक सर्जरी
बच्चे की जान बचाने के लिए जन्म के दूसरे ही दिन डॉक्टरों को दो महत्वपूर्ण सर्जरी करनी पड़ी। सबसे पहले इसोफेगोस्टॉमी (Oesophagostomy) की गई, जिसमें गर्दन पर एक छोटा-सा रास्ता बनाया गया। इसके साथ ही गैस्ट्रोस्टॉमी (Gastrostomy) की गई, जिसके जरिए पेट में सीधे एक फीडिंग ट्यूब डाली गई। इसी ट्यूब के माध्यम से बच्चे को कई महीनों तक तरल पोषण दिया जाता रहा। इस दौरान डॉक्टर लगातार उसकी सेहत, वजन और शारीरिक विकास पर नजर रखते रहे।
गैस्ट्रिक पुल-अप तकनीक से बनाई नई भोजन नली
जब डॉक्टरों को लगा कि बच्चे का वजन, पोषण और शारीरिक विकास सर्जरी के लिए पर्याप्त हो चुका है, तब स्थायी इलाज की योजना बनाई गई। 3 जुलाई को विशेषज्ञों की टीम ने गैस्ट्रिक पुल-अप (Gastric Pull-Up) तकनीक से जटिल ऑपरेशन किया। इस प्रक्रिया में पेट (Stomach) का उपयोग करके नई भोजन नली तैयार की जाती है, ताकि मुंह से खाया गया भोजन सामान्य रूप से पेट तक पहुंच सके।
यह सर्जरी अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश जोशी के नेतृत्व में की गई। उनके साथ डॉ. जयश्री रामजी तथा एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. अदिति और डॉ. सोनल भालावत भी इस टीम का हिस्सा थीं।
23 दिन बाद पहली बार मुंह से खाया खाना
सर्जरी के बाद बच्चे की रिकवरी अच्छी रही। ऑपरेशन के 23 दिन बाद मंतव्य ने पहली बार अपने मुंह से खाना खाया। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी रिकवरी के दौरान कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई और स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अपने बेटे को पहली बार सामान्य तरीके से खाना खाते देखकर उसके माता-पिता भावुक हो गए। उन्होंने इलाज करने वाले डॉक्टरों और पूरे मेडिकल स्टाफ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
कितनी दुर्लभ है यह बीमारी?
मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रेकियो-इसोफेगल फिस्टुला (Tracheo-Oesophageal Fistula-TOF) लगभग हर 2,500 से 4,000 नवजात शिशुओं में से एक को प्रभावित करता है। हालांकि, प्योर इसोफेगल एट्रेसिया, जिसमें भोजन नली के दोनों सिरे काफी दूर होते हैं, इससे भी अधिक दुर्लभ स्थिति है। ऐसे मामलों में गैस्ट्रिक पुल-अप सर्जरी सबसे प्रभावी उपचार मानी जाती है। उपलब्ध मेडिकल आंकड़ों के अनुसार, इस सर्जरी की सफलता दर लगभग 85 से 90 प्रतिशत तक होती है।
डॉक्टर बोले- सही समय पर इलाज और पोषण है सबसे अहम
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट और पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. राकेश जोशी ने बताया कि इस तरह की सर्जरी के लिए अत्यधिक तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभवी मेडिकल टीम की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन से पहले बच्चे का पोषण बेहतर बनाए रखना और सही समय पर सर्जरी करना सफलता की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों में इस तरह की सर्जरी काफी महंगी होती है, लेकिन अहमदाबाद सिविल अस्पताल में यह सुविधा मरीजों को पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाती है। पिछले एक वर्ष में अस्पताल की टीम ऐसे सात जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक कर चुकी है।








