NEET परीक्षा को लेकर हुए विवाद के बीच लंबे समय तक चुप रहने के बाद आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है। संसद में बोलते हुए उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य कभी मीडिया की सुर्खियां बटोरना नहीं था, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस समाधान निकालना था।
Public Examination (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि समय के साथ उनकी भूमिका बदल गई है। उनके मुताबिक, पहले विपक्ष में रहते हुए उनकी जिम्मेदारी मुद्दे उठाने की थी, लेकिन अब उनकी प्राथमिकता समस्याओं का समाधान निकालना है।
राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने खुद से वादा किया था कि वह तभी इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बोलेंगे, जब व्यवस्था में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना था कि केवल बयान देकर या कैमरों के सामने आकर चर्चा में बने रहना उनका उद्देश्य नहीं था।
उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा कायम रखने के लिए एंटी-पेपर लीक कानून को एक महत्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सख्त कानून और मजबूत व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
गौरतलब है कि NEET पेपर लीक विवाद के दौरान देशभर में छात्रों और विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किए थे। उस समय राघव चड्ढा की चुप्पी को लेकर कई सवाल भी उठे थे। अब उनके इस बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
जहां उनके समर्थक इसे समाधान-केंद्रित सोच बता रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि जब देशभर में छात्र आंदोलन कर रहे थे, तब उन्हें अपनी बात पहले ही रखनी चाहिए थी। फिलहाल, राघव चड्ढा के इस बयान ने NEET विवाद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है।








