फ्रांस में एक फुल-टाइम कर्मचारी के लिए हफ्ते में 35 घंटे काम करना कानूनी तौर पर तय है। ऐसे में वहां की लेबर अथॉरिटी ने भारतीय आईटी कंपनी Infosys पर करीब 1.75 लाख यूरो (लगभग ₹2 करोड़) का जुर्माना लगाया है। वजह यह नहीं है कि कर्मचारियों से ज्यादा काम कराया गया, बल्कि कंपनी के कर्मचारियों के वर्किंग आवर्स रिकॉर्ड करने वाले सिस्टम में कुछ ऐसी कमियां मिलीं, जो फ्रांस के लेबर कानून के मुताबिक पूरी तरह सही नहीं थीं।
कंपनी की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, फ्रांस की क्षेत्रीय लेबर अथॉरिटी DRIEETS Île-de-France ने जांच के दौरान पाया कि Infosys का टाइम-ट्रैकिंग सिस्टम कुछ कर्मचारियों के लिए स्थानीय नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करता। अथॉरिटी ने सिस्टम की विश्वसनीयता, ऑडिट की सुविधा और कर्मचारियों के काम के घंटे सही तरीके से रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि यह मामला किन कर्मचारियों से जुड़ा है।
फ्रांस में कंपनियों के लिए कर्मचारियों के काम के घंटे दर्ज करना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि कानूनी जिम्मेदारी है। जरूरत पड़ने पर यह रिकॉर्ड अधिकारियों को दिखाना होता है और कर्मचारी भी अपने काम के घंटों का रिकॉर्ड देखने का अधिकार रखते हैं।
Infosys ने कहा है कि इस जुर्माने से कंपनी के कारोबार या वित्तीय स्थिति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। कंपनी फिलहाल फ्रांसीसी अथॉरिटी के आदेश का अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई पर विचार कर रही है। हालांकि यह साफ नहीं किया गया है कि कंपनी को अपने मौजूदा टाइम-रिकॉर्डिंग सिस्टम में बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं या नहीं।
फिर चर्चा में आया 70 घंटे वाला बयान
इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर Infosys के को-फाउंडर एन. आर. नारायण मूर्ति का पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया। कई यूजर्स फ्रांस के 35 घंटे वाले वर्क वीक और भारत में लंबे समय तक काम करने की बहस की तुलना करते हुए अपनी राय साझा कर रहे हैं।
दरअसल, साल 2023 में एक पॉडकास्ट के दौरान नारायण मूर्ति ने कहा था कि अगर भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना है तो युवाओं को हफ्ते में 70 घंटे काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान पर उस समय भी काफी बहस हुई थी। कुछ लोगों ने इसे देश की तरक्की के लिए जरूरी बताया था, जबकि कई लोगों ने वर्क-लाइफ बैलेंस और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी।
फ्रांस का कानून क्या कहता है?
फ्रांस में निजी क्षेत्र के फुल-टाइम कर्मचारियों के लिए 35 घंटे का वर्क वीक कानूनी तौर पर तय है। जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों से अतिरिक्त काम कराया जा सकता है, लेकिन उसके लिए ओवरटाइम के नियम और भुगतान पहले से तय हैं। कंपनियों के लिए कर्मचारियों के काम के घंटे सही तरीके से रिकॉर्ड करना भी अनिवार्य है।
फिलहाल मामला किस बात का है?
ध्यान देने वाली बात यह है कि Infosys पर लगाया गया जुर्माना कर्मचारियों से ज्यादा घंटे काम कराने को लेकर नहीं है। यह कार्रवाई केवल वर्किंग आवर्स रिकॉर्ड करने वाले सिस्टम में नियमों के मुताबिक कमियां पाए जाने के कारण की गई है।
हालांकि इस घटना ने एक बार फिर लंबे वर्किंग आवर्स, ओवरटाइम और वर्क-लाइफ बैलेंस पर बहस को हवा दे दी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि Infosys इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है और क्या फ्रांसीसी अथॉरिटी की ओर से कोई नया अपडेट आता है।








