होम देश दुनिया खेल मनोरंजन लाइफस्टाइल
वेब स्‍टोरी ज़रा हटके

ट्रंप का दावा: ईरान कभी नहीं बनाएगा परमाणु हथियार, $300 बिलियन फंड पर बढ़ा विवाद

By Nandini Sharma

Published on:

Trump Hails Iran Nuclear Commitment
---Advertisement---

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने कभी भी परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच एक नए समझौता ज्ञापन (MoU) की खबरें सामने आ रही हैं, जिसे दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, इस संभावित समझौते में ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना, कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना और देश के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 300 अरब डॉलर का फंड उपलब्ध कराना शामिल हो सकता है।

हालांकि अभी तक इस समझौते का आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे इसके प्रावधानों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है।

अभी तक ट्रंप की टीम ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि समझौते के तहत ईरान के परमाणु गतिविधियों की निगरानी कौन करेगा, नियमों के पालन की पुष्टि कैसे होगी और उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम के मौजूदा भंडार का क्या होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों पर स्पष्टता के बिना किसी भी समझौते की प्रभावशीलता पर सवाल उठ सकते हैं।

ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, 19 जून को हस्ताक्षरित MoU अंतिम समझौते की दिशा में पहला कदम हो सकता है। बताया जा रहा है कि इसके बाद 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच विस्तृत बातचीत होगी, जिसके दौरान परमाणु कार्यक्रम और अन्य संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस समझौते का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान को तब तक कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलेगा, जब तक वह अपनी सभी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन नहीं करता।

ABC News से बातचीत में वेंस ने कहा कि व्हाइट हाउस जल्द ही समझौते का पूरा पाठ सार्वजनिक करेगा ताकि लोग इसकी शर्तों को समझ सकें।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी एक वीडियो संदेश में वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप शुरू से ही स्पष्ट रहे हैं कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप की कूटनीतिक कोशिशों ने एक बार फिर शांति स्थापित करने में सफलता हासिल की है।

हालांकि इस प्रस्तावित समझौते को कुछ लोग बड़ी कूटनीतिक सफलता मान रहे हैं, लेकिन आलोचकों का कहना है कि अभी कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। विशेष रूप से 300 अरब डॉलर के संभावित फंड, प्रतिबंधों में राहत और निगरानी व्यवस्था को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि यह प्रारंभिक समझौता वास्तव में एक व्यापक और प्रभावी परमाणु समझौते का रूप ले पाता है या नहीं। पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली आगामी वार्ताओं पर टिकी हुई है।

---Advertisement---

Leave a Comment