पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS आज दुनिया भर में महिलाओं में तेजी से बढ़ रही एक आम हार्मोनल समस्या है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रजनन आयु की लगभग 5 से 20 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी रूप में इस समस्या से प्रभावित हैं। PCOS के कारण अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे और गर्भधारण में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन इसका असर केवल प्रजनन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता।
PCOS से पीड़ित महिलाओं में टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं जैसे तनाव और डिप्रेशन का खतरा भी बढ़ जाता है। यही वजह है कि इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए अक्सर दवाओं, खान-पान में बदलाव और नियमित व्यायाम की सलाह दी जाती है।
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एनाटॉमी विभाग की लैब फॉर मॉलिक्यूलर रिप्रोडक्शन एंड जेनेटिक्स की फैकल्टी इंचार्ज प्रोफेसर रीमा दादा के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में PCOS के प्रबंधन में योग की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है। शोध के दौरान PCOS से पीड़ित महिलाओं को 12 सप्ताह तक सप्ताह में पांच दिन, प्रतिदिन 90 मिनट योग का अभ्यास कराया गया। इस कार्यक्रम में आसन, प्राणायाम और ध्यान को शामिल किया गया। अध्ययन में हार्मोन संतुलन, सूजन में कमी और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार जैसे कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।
रिसर्च में पाया गया कि नियमित योग करने से हार्मोन संतुलन में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन, ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और एंटी-मुलरियन हार्मोन (AMH) के स्तर में कमी देखी गई। वहीं फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH) और एस्ट्राडियोल के स्तर में सुधार हुआ। इसके परिणामस्वरूप कई महिलाओं के मासिक धर्म चक्र अधिक नियमित हो गए।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि योग शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में हानिकारक अणुओं की मात्रा बढ़ जाती है, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं और हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकते हैं।
रिसर्च का एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष टेलोमीयर से जुड़ा था। टेलोमीयर हमारे क्रोमोसोम के सिरों पर मौजूद सुरक्षात्मक संरचनाएं होती हैं, जो उम्र बढ़ने के साथ छोटी होती जाती हैं। PCOS से पीड़ित महिलाओं में यह प्रक्रिया तेज हो सकती है। अध्ययन में पाया गया कि योग करने वाली महिलाओं के टेलोमीयर अपेक्षाकृत लंबे थे, जो धीमी जैविक उम्र बढ़ने और बेहतर प्रजनन स्वास्थ्य का संकेत माना जाता है।
योग से शरीर में सूजन के स्तर में भी कमी देखी गई। TNF-alpha और IL-6 जैसे सूजन बढ़ाने वाले मार्कर कम पाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य के स्तर पर भी योग के सकारात्मक परिणाम सामने आए। अध्ययन में शामिल महिलाओं में तनाव और डिप्रेशन के लक्षणों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि योग शरीर में तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल को कम करता है और मस्तिष्क में ऐसे रसायनों को बढ़ाता है जो मानसिक संतुलन और भावनात्मक मजबूती को बेहतर बनाते हैं।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है। यह शरीर, मन और तंत्रिका तंत्र पर एक साथ काम करता है। नियमित योग से शरीर तनाव की स्थिति से बाहर निकलकर संतुलन की ओर बढ़ता है, जिसका असर हार्मोन, मेटाबॉलिज्म और संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ता है।
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि योग दवाओं का विकल्प नहीं है, लेकिन यह PCOS के उपचार में एक प्रभावी सहायक उपाय जरूर बन सकता है। कम खर्च, आसान उपलब्धता और लगभग बिना किसी साइड इफेक्ट के कारण योग महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक विकल्प साबित हो सकता है।
यह अध्ययन संकेत देता है कि सिर्फ 12 हफ्तों का नियमित योग भी हार्मोन, मानसिक स्वास्थ्य, फर्टिलिटी और जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। PCOS से जूझ रही महिलाओं के लिए यह एक उम्मीद भरी खबर है।







