आजकल बच्चों और किशोरों में डिप्रेशन यानी अवसाद की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह सिर्फ उदासी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पढ़ाई, दोस्तों और परिवार के साथ रिश्तों, आत्मविश्वास और रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकता है। आमतौर पर डिप्रेशन के इलाज में दवाएं और काउंसलिंग का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन अब वैज्ञानिक ऐसे उपायों की भी तलाश कर रहे हैं जो इलाज के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकें।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक नई स्टडी में पाया गया है कि योग बच्चों और किशोरों में डिप्रेशन के इलाज में एक सहायक भूमिका निभा सकता है। यह अध्ययन International Journal of Yoga में प्रकाशित हुआ है।
बच्चों के लिए खास योग कार्यक्रम तैयार किया गया
AIIMS के शोधकर्ताओं ने बच्चों और किशोरों में मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर (MDD) को ध्यान में रखते हुए एक विशेष योग कार्यक्रम तैयार किया। इसके लिए सबसे पहले पारंपरिक योग ग्रंथों और पहले से प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययनों की समीक्षा की गई। इसके आधार पर एक योग मॉड्यूल बनाया गया।
इसके बाद योग विशेषज्ञों ने इस कार्यक्रम की समीक्षा की और इसे मान्यता दी। अंतिम चरण में पांच बच्चों और किशोरों पर इसका परीक्षण किया गया, जिन्हें डिप्रेशन की समस्या थी।
शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के डिप्रेशन स्तर का मूल्यांकन किया। साथ ही उनके देखभाल करने वालों में तनाव, चिंता और अवसाद जैसे कारकों का भी अध्ययन किया गया।
बच्चों को पसंद आया योग
स्टडी में शामिल बच्चों और किशोरों ने योग सत्रों को सकारात्मक अनुभव बताया। अधिकांश प्रतिभागियों ने कहा कि योग करने से उन्हें शांति महसूस हुई, मन शांत हुआ और वे पहले से बेहतर महसूस करने लगे।
कुछ प्रतिभागियों ने बताया कि योग ने उन्हें अपनी भावनाओं और शरीर में होने वाले बदलावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद की। कई बच्चों ने घर पर भी योग जारी रखने की इच्छा जताई।
महत्वपूर्ण बात यह रही कि पूरे अध्ययन के दौरान किसी भी प्रतिभागी में कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं देखा गया।
डिप्रेशन के लक्षणों में दिखा सुधार
12 सप्ताह के हस्तक्षेप के बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रतिभागियों के डिप्रेशन स्कोर में कमी आई थी। इसके अलावा उनकी भावनात्मक स्थिति, आत्म-जागरूकता और रोजमर्रा के कामकाज में भी सुधार देखा गया।
शोधकर्ताओं के अनुसार, योग बच्चों और किशोरों को अपनी भावनाओं को समझने, तनाव को संभालने और मानसिक रूप से अधिक मजबूत बनने में मदद कर सकता है। यह उन्हें अपने विचारों, भावनाओं और शारीरिक अनुभवों के प्रति अधिक जागरूक बनाता है।
अभी और शोध की जरूरत
हालांकि अध्ययन के नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह एक छोटा पायलट अध्ययन था और इसमें केवल पांच प्रतिभागी शामिल थे। साथ ही इसमें कोई नियंत्रण समूह (Control Group) नहीं था।
इसलिए यह तय करने के लिए कि योग वास्तव में डिप्रेशन के इलाज में कितना प्रभावी है, बड़े स्तर पर और अधिक शोध की आवश्यकता होगी।
फिर भी, अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि योग बच्चों और किशोरों में डिप्रेशन के लिए एक सुरक्षित, स्वीकार्य और सहायक थेरेपी हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि योग को डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवा और काउंसलिंग का विकल्प नहीं, बल्कि एक पूरक उपाय के रूप में देखा जाना चाहिए।
यह अध्ययन इस बात को और मजबूत करता है कि योग मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और डिप्रेशन से जूझ रहे युवाओं की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।







