अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह बीमारी सिर्फ मरीज के लिए ही नहीं, बल्कि उसकी देखभाल करने वाले परिवार के लोगों के लिए भी बड़ी चुनौती बन जाती है।
अब AIIMS नई दिल्ली के शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक नई स्टडी में पाया गया है कि योग अल्जाइमर के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है। अध्ययन के अनुसार, 12 सप्ताह तक नियमित योग करने से मरीजों की याददाश्त, मानसिक क्षमता, मूड और जीवन की गुणवत्ता में सुधार देखा गया। साथ ही उनकी देखभाल करने वाले लोगों का तनाव भी कम हुआ।
यह अध्ययन प्रो. रीमा दादा के नेतृत्व में किया गया, जिसमें डॉ. प्रभाकर तिवारी और AIIMS के कई अन्य शोधकर्ताओं ने भी भाग लिया।
स्टडी में क्या किया गया?
अध्ययन में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 30 ऐसे लोगों को शामिल किया गया जिन्हें हल्के से मध्यम स्तर का अल्जाइमर था। इन प्रतिभागियों को 12 सप्ताह तक योग कराया गया। योग सत्र एक घंटे का होता था और सप्ताह में छह दिन आयोजित किया गया। इसमें योगासन, प्राणायाम, ध्यान और रिलैक्सेशन तकनीकों को शामिल किया गया।
योग शुरू होने से पहले और कार्यक्रम पूरा होने के बाद मरीजों की मानसिक स्थिति, याददाश्त, अवसाद और सोचने-समझने की क्षमता का मूल्यांकन किया गया।
याददाश्त और मानसिक क्षमता में सुधार
शोधकर्ताओं ने पाया कि योग करने के बाद मरीजों की याददाश्त और मानसिक कार्यक्षमता में सुधार हुआ। उनकी ध्यान लगाने की क्षमता, भाषा कौशल, सोचने की क्षमता और पुरानी बातों को याद रखने की क्षमता पहले की तुलना में बेहतर देखी गई। कुल मिलाकर, मानसिक प्रदर्शन से जुड़े स्कोर में सकारात्मक बदलाव दर्ज किया गया।
अवसाद के लक्षण भी हुए कम
अध्ययन में यह भी पाया गया कि योग करने वाले मरीजों में अवसाद के लक्षण कम हुए। कई प्रतिभागियों का मूड बेहतर हुआ और वे पहले की तुलना में अधिक शांत और सकारात्मक महसूस करने लगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि योग तनाव कम करने और मन को शांत रखने में मदद कर सकता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा असर पड़ता है।
देखभाल करने वालों को भी मिला फायदा
अल्जाइमर के मरीजों की देखभाल करना आसान नहीं होता। परिवार के सदस्य और केयरगिवर्स अक्सर मानसिक और शारीरिक तनाव का सामना करते हैं।
इस स्टडी में पाया गया कि जब मरीजों की स्थिति में सुधार हुआ तो उनकी देखभाल करने वालों का तनाव और बोझ भी कम हुआ। इससे उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया।
आंत और दिमाग के बीच संबंध पर भी असर
शोधकर्ताओं ने एक और दिलचस्प बात देखी। योग करने के बाद मरीजों की आंतों (गट) में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ी। Faecalibacterium, Roseburia और Bifidobacterium जैसे लाभकारी बैक्टीरिया अधिक पाए गए, जबकि सूजन बढ़ाने वाले कुछ हानिकारक बैक्टीरिया कम हो गए।
वैज्ञानिकों का मानना है कि आंत और दिमाग के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध होता है, जिसे “गट-ब्रेन एक्सिस” कहा जाता है। स्वस्थ आंतें दिमाग के बेहतर कामकाज में मदद कर सकती हैं।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
हालांकि यह अध्ययन अपेक्षाकृत छोटे समूह पर किया गया था और इसके परिणामों की पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर और शोध की जरूरत है, लेकिन निष्कर्ष उत्साहजनक हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि योग अल्जाइमर के मरीजों के लिए एक सुरक्षित, आसान और कम खर्च वाला सहायक उपाय हो सकता है। यह दवाओं का विकल्प नहीं है, लेकिन इलाज के साथ मिलकर मरीजों की जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
यह अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि नियमित योग न केवल दिमाग बल्कि शरीर और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।







