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“पापा, आग लग गई है, मुझे बचा लो”: लखनऊ की उस रात की दर्दनाक कहानी

By Nandini Sharma

Published on:

lucknow fire
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लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को हुई भीषण आग ने 15 परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। एक कमर्शियल बिल्डिंग में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में भयावह रूप ले लिया। अंदर फंसे छात्र और कर्मचारी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे, लेकिन कई लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।

इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन आखिरी फोन कॉल्स की है, जो आग में फंसे युवाओं ने अपने परिजनों को की थीं।

“पापा, यहां आग लग गई है, मुझे बचा लो”

23 वर्षीय सुखमनी सिंह भी उन लोगों में शामिल थे जो आग लगने के समय बिल्डिंग के अंदर मौजूद थे। धुएं और आग के बीच फंसे सुखमनी ने अपने पिता को फोन किया।

उनके पिता के मुताबिक, बेटे ने घबराई हुई आवाज में कहा, “पापा, यहां आग लग गई है, मुझे बचा लो।”

परिवार तुरंत मौके के लिए रवाना हुआ, लेकिन जब तक वे पहुंचे, आग पूरी इमारत में फैल चुकी थी। बचाव दल अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हालात बेहद खराब थे। सुखमनी को बचाया नहीं जा सका।

मोहम्मद शाहजहां की आखिरी पुकार

बाराबंकी के रहने वाले मोहम्मद शाहजहां ने भी अपने पिता को आखिरी बार फोन किया था। आग और धुएं से घिरे शाहजहां ने सिर्फ इतना कहा, “पापा, मुझे बचा लो।”

यह सुनते ही उनके पिता मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उनका इकलौता बेटा हमेशा के लिए उनसे दूर जा चुका था।

परिवार वालों का कहना है कि शाहजहां बेहतर भविष्य के सपने लेकर लखनऊ आया था। किसी ने नहीं सोचा था कि उसका सफर इस तरह खत्म हो जाएगा।

बाथरूम में छिपे छात्र, खिड़कियों से बचने की कोशिश

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर पर मौजूद पशु उत्पादों की दुकानों में लगी और धीरे-धीरे ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गई। दूसरी मंजिल पर एनीमेशन स्टूडियो और कोचिंग सेंटर चल रहे थे, जहां कई छात्र मौजूद थे।

जब धुआं तेजी से फैलने लगा, तो कुछ छात्रों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया। उन्हें उम्मीद थी कि रेस्क्यू टीम उन्हें समय रहते बाहर निकाल लेगी।

कुछ लोग खिड़कियों और पाइपों के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करते रहे। एक छात्र ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल से छलांग लगा दी और गंभीर रूप से घायल हो गया।

बाहर परिवारों की चीखें, अंदर जिंदगी की जंग

बिल्डिंग के बाहर का दृश्य किसी दुःस्वप्न से कम नहीं था। अपने बच्चों और परिजनों के फोन मिलने के बाद कई परिवार मौके पर पहुंच गए।

एक मां लगातार पुलिसकर्मियों से कहती रही, “मुझे मेरे बेटे के पास जाने दो।”

वहीं स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आए। कई लोगों ने शीशे तोड़े, रास्ता बनाने की कोशिश की और दमकल कर्मियों की सहायता की। लेकिन घना धुआं और आग की तीव्रता राहत कार्य में बड़ी बाधा बन गए।

शादी की तैयारियां मातम में बदलीं

इस हादसे ने कई परिवारों के सपने छीन लिए। मृतकों में निलेश कुमार और अनामिका सामंत भी शामिल थे, जिनकी जल्द शादी होने वाली थी। दोनों परिवार शादी की तैयारियों में जुटे थे, लेकिन अब उनके घरों में मातम पसरा हुआ है।

25 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव ने भी आग में फंसने के बाद अपने सहयोगी को फोन कर मदद मांगी थी। लेकिन मदद पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो गई।

करीब एक घंटे तक धधकती रही इस आग में कुल 24 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें से 15 लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

अब हादसे के बाद बिल्डिंग की सुरक्षा व्यवस्था, फायर सेफ्टी नियमों और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जांच शुरू हो चुकी है, लेकिन जिन परिवारों ने अपने बच्चों और अपनों को खो दिया है, उनके लिए अब किसी जांच से ज्यादा दर्द उन आखिरी शब्दों का है, जो उन्होंने फोन पर सुने थे – “पापा, मुझे बचा लो।”

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