नई दिल्ली, 27 दिसंबर।
साल 2025 अब अपने आखिरी दौर में है और नया साल 2026 बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है। बीतता साल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई मायनों में खास रहा। वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और महंगे कच्चे तेल के बावजूद भारत ने न सिर्फ स्थिरता बनाए रखी, बल्कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह भी कायम रखी।
आइए नज़र डालते हैं उन 6 बड़े कारकों पर, जिन्होंने 2025 में भारत की Economic Growth को दिशा और रफ्तार दी।
1. IMF ने बढ़ाया भारत की Growth का अनुमान
साल 2025 में भारत एक बार फिर दुनिया की fastest growing major economy बना रहा।
International Monetary Fund (IMF) ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की growth forecast को 6.7% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया। अगले वित्त वर्ष के लिए भी अनुमान में सुधार किया गया। इसके पीछे income tax relief, liberal monetary policy, GST reforms और US-India trade deal की संभावनाएं अहम रहीं।
2. Government Investment से Infrastructure को मजबूती
IMF और RBI दोनों के अनुसार, 2025 में सरकार ने infrastructure, manufacturing, electronics, automobile और renewable energy sectors में भारी निवेश किया।
सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और green energy projects ने न सिर्फ growth को सपोर्ट किया, बल्कि employment और demand को भी मजबूती दी।
3. महंगाई में बड़ी राहत, आम आदमी को फायदा
अक्टूबर 2025 में retail inflation सिर्फ 0.25% रही, जो RBI के 4% target से काफी नीचे है।
कम महंगाई से आम लोगों की purchasing power बढ़ी और consumption में सुधार देखने को मिला, जो economic recovery के लिए बेहद अहम रहा।
4. RBI की Repo Rate कटौती से सस्ते हुए लोन
दिसंबर 2025 की MPC meeting में Reserve Bank of India ने repo rate को 25 basis points घटाकर 5.25% कर दिया।
यह 2025 में चौथी rate cut थी। इससे home loan, auto loan और MSME lending को बढ़ावा मिला और economic activity में तेजी आई।
5. Services Export और Remittance बने मजबूत सहारा
2025 में IT, BPO, consulting, remote healthcare और online education जैसी services का export मजबूत बना रहा।
IMF के मुताबिक, strong services export और overseas remittances ने current account balance को स्थिर बनाए रखा, भले ही energy prices और tariffs को लेकर अनिश्चितता बनी रही।
6. IPO Boom और घरेलू निवेशकों का भरोसा
अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच 86 IPOs से करीब ₹1.71 लाख करोड़ जुटाए गए, जो पिछले साल से लगभग दोगुना है।
ज्यादातर IPOs oversubscribe हुए और Nifty से करीब चार गुना बेहतर returns दिए।
हालांकि foreign investors का रुख मिला-जुला रहा, लेकिन SIP, बढ़ते Demat accounts और “buy on dips” mindset वाले घरेलू निवेशकों ने शेयर बाजार को मजबूती दी।
साल 2025 ने साबित किया कि मजबूत नीतियां, घरेलू मांग और निवेशकों का भरोसा मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक चुनौतियों के बीच भी आगे बढ़ा सकते हैं। यही आधार 2026 की growth story को भी दिशा देगा।







