नई दिल्ली, 16 जनवरी 2025। महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के बीच ‘स्याही विवाद’ ने सियासी हलचल तेज कर दी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भारतीय चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग जनता को गुमराह कर रहा है और इससे लोकतंत्र में भरोसा कमजोर हो रहा है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि “वोट चोरी एक राष्ट्र-विरोधी काम है” और चुनाव आयोग का रवैया लोकतांत्रिक विश्वास को नुकसान पहुंचा रहा है। उनका यह बयान महाराष्ट्र में 29 नगर निकायों, खासतौर पर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनावों की मतगणना शुरू होने के तुरंत बाद सामने आया।
क्या है ‘स्याही विवाद’?
चुनाव के दौरान मतदाताओं की उंगली पर लगाई जाने वाली अमिट स्याही का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई व्यक्ति दोबारा वोट न डाल सके। लेकिन मुंबई नगर निगम चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि मतदाताओं की उंगलियों पर लगी स्याही आसानी से सैनिटाइज़र या रगड़ने से मिट रही थी।
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कुछ मतदान केंद्रों पर अमिट स्याही की जगह मार्कर पेन का इस्तेमाल किया गया, जिससे दोबारा मतदान की आशंका पैदा हो सकती है। इसी पूरे मामले को ‘स्याही विवाद’ कहा जा रहा है।
Election commission gaslighting citizens is how trust has collapsed in our democracy.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 16, 2026
Vote Chori is an anti-national act. pic.twitter.com/3FZKkDPwDg
भाजपा का जवाब
राहुल गांधी के आरोपों पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि विपक्ष अपनी संभावित हार से ध्यान हटाने के लिए चुनाव आयोग को निशाना बना रहा है। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष को “बहाना ब्रिगेड” बताते हुए कहा कि गिनती पूरी होने से पहले ही हार मान ली गई है।
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि जब भी नतीजे कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते, पार्टी किसी न किसी संस्था को दोष देने लगती है।
चुनाव आयोग की स्थिति
विवाद बढ़ने के बाद राज्य चुनाव आयोग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। आयोग का कहना है कि वायरल वीडियो की प्रामाणिकता की जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि मामला वास्तविक है या शरारतपूर्ण।
फिलहाल, ‘स्याही विवाद’ ने मुंबई नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है, जहां एक ओर विपक्ष चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को हार का बहाना बता रहा है।







