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होम्योपैथी को लेकर भ्रामक बयानों से बचें, हो सकती है कार्रवाई: राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग NCH ने जारी की सलाह

By Nandini Sharma

Published on:

National Commission for Homoeopathy
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नई दिल्ली: राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (NCH) ने होम्योपैथी और पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सकों के संबंध में की जाने वाली सार्वजनिक टिप्पणियों को लेकर एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। आयोग ने मीडिया संस्थानों, विभिन्न संगठनों और आम जनता से अपील की है कि वे होम्योपैथी से जुड़े किसी भी विषय पर बयान देते समय जिम्मेदारी और तथ्यात्मक सटीकता का पालन करें।

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग के अध्यक्ष डॉ. तारकेश्वर जैन ने बताया कि आयोग ने होम्योपैथी और उसके चिकित्सकों के खिलाफ की जा रही गैर-जिम्मेदाराना, अपुष्ट और भ्रामक टिप्पणियों को गंभीरता से लिया है। इसी के मद्देनज़र आयोग ने एक परिपत्र जारी कर सभी हितधारकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

डॉ. जैन ने कहा कि हाल के दिनों में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होम्योपैथी और उसके चिकित्सकों के बारे में अपमानजनक, मानहानिकारक और अप्रमाणित दावे प्रसारित किए जाने के मामले सामने आए हैं। ऐसे में सार्वजनिक विमर्श में तथ्यात्मक जानकारी और जिम्मेदार संवाद को बढ़ावा देना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग अधिनियम, 2020 के तहत होम्योपैथी भारत में कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त चिकित्सा पद्धति है। वहीं, होम्योपैथिक दवाएं ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत विनियमित होती हैं।

डॉ. जैन ने यह भी कहा कि होम्योपैथी में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक ढांचे के तहत संचालित किए जाते हैं और इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश NEET योग्यता के आधार पर होता है।

उन्होंने कहा कि पंजीकृत होम्योपैथिक चिकित्सक निर्धारित शिक्षा एवं प्रशिक्षण मानकों को पूरा करने के बाद ही अभ्यास करने के लिए अधिकृत होते हैं और वे लागू कानूनी एवं नियामक प्रावधानों के अनुसार अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं।

आयोग ने शैक्षणिक संस्थानों, पेशेवर संगठनों, स्वास्थ्य सेवा संस्थानों, मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से आग्रह किया है कि वे होम्योपैथी या उसके चिकित्सकों के बारे में कोई भी सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जांच अवश्य करें।

सलाह में यह भी कहा गया है कि यदि किसी व्यक्तिगत चिकित्सक के आचरण को लेकर कोई शिकायत, आरोप या चिंता है, तो उसे संबंधित वैधानिक, नियामक, अनुशासनात्मक या न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से उठाया जाना चाहिए। पूरे पेशे या चिकित्सा पद्धति के खिलाफ  आरोप लगाना उचित नहीं है।

राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग ने दोहराया कि वह होम्योपैथी और पंजीकृत चिकित्सकों की गरिमा, अखंडता और वैधानिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। आयोग ने चेतावनी दी है कि जानबूझकर झूठी, भ्रामक या मानहानिकारक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

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