सर्दियों के मौसम में शरीर को गर्मियों की तुलना में अधिक देखभाल की जरूरत होती है। ठंड के कारण प्यास कम लगती है, जिससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है। ऐसे में एक आम सवाल उठता है—सर्दियों में ठंडा पानी पीना बेहतर है या गर्म (गुनगुना) पानी? आयुर्वेद इस सवाल का संतुलित जवाब देता है।
आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में गुनगुना पानी पीना ज्यादा लाभकारी माना जाता है। गुनगुना पानी पाचन अग्नि को तेज करता है, जिससे भोजन आसानी से पचता है और गैस, अपच व कब्ज जैसी समस्याएं कम होती हैं। इसके अलावा यह गले के लिए भी औषधि की तरह काम करता है और सर्दी, खांसी, टॉन्सिल या आवाज बैठने की समस्या से राहत देता है।
गुनगुना पानी किडनी और मूत्राशय को डिटॉक्स करने में भी मदद करता है, जिससे शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते रहते हैं। आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में वात और कफ दोष बढ़ने लगते हैं, ऐसे में गुनगुना पानी इन दोनों को संतुलित रखने में सहायक होता है और सर्दी-जुकाम से बचाव करता है।
वहीं दूसरी ओर, सामान्य या मटके का ठंडा पानी भी कुछ परिस्थितियों में फायदेमंद होता है। यदि किसी को अत्यधिक थकान, चक्कर, घबराहट या शरीर में जलन की समस्या हो, तो ठंडा पानी राहत पहुंचा सकता है। रक्त से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी ठंडा पानी लाभकारी माना गया है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को ठंडा पानी फायदा पहुंचा सकता है।
हालांकि, आयुर्वेद यह भी चेतावनी देता है कि हर किसी के लिए ठंडा पानी सही नहीं होता। जिन लोगों को बुखार, कफ की समस्या, भूख न लगना, पसलियों में दर्द या सर्दी-जुकाम की शिकायत हो, उन्हें ठंडे पानी से परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे समस्या बढ़ सकती है।
अब सवाल आता है—कब और कितना पानी पीना चाहिए? आयुर्वेद के अनुसार, मौसम कोई भी हो, सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना सबसे फायदेमंद होता है। इसके अलावा उतना ही पानी पिएं, जितनी शरीर को जरूरत हो। बिना प्यास लगे जबरदस्ती पानी पीना ठीक नहीं माना जाता।
भोजन से करीब 30 मिनट पहले गुनगुना पानी पीने से पाचन शक्ति बेहतर होती है और भूख भी अच्छी लगती है। कुल मिलाकर, आयुर्वेद यही कहता है कि पानी का तापमान व्यक्ति की प्रकृति और स्थिति के अनुसार चुनना चाहिए।







