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52 भारतीय संस्थानों को QS Rankings 2027 में जगह, IIT Delhi बना देश का शीर्ष संस्थान

By Nandini Sharma

Published on:

QS World University Rankings 2027
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भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को एक बड़ी उपलब्धि मिली है। QS World University Rankings 2027 में IIT Delhi एक बार फिर देश का सर्वोच्च रैंक प्राप्त करने वाला संस्थान बनकर उभरा है। संस्थान ने वैश्विक स्तर पर 118वीं रैंक हासिल की है, जो पिछले वर्ष की 123वीं रैंक से पांच स्थान बेहतर है। इसके साथ ही IIT Delhi ने QS रैंकिंग में किसी भारतीय संस्थान द्वारा हासिल की गई सर्वोच्च रैंक की बराबरी भी कर ली है।

18 जून 2026 को जारी QS World University Rankings 2027 में कुल 52 भारतीय संस्थानों को स्थान मिला है। यह भारत की उच्च शिक्षा और अनुसंधान क्षमता की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाता है। IIT Bombay ने 134वीं रैंक के साथ दूसरा स्थान बरकरार रखा, जबकि IIT Madras ने 10 स्थान की छलांग लगाकर 170वीं रैंक हासिल की।

IIT Delhi की सफलता के पीछे क्या रहा कारण?

IIT Delhi की रैंकिंग में सुधार कई प्रमुख मानकों पर बेहतर प्रदर्शन का परिणाम है। संस्थान ने Employer Reputation यानी नियोक्ताओं के बीच अपनी प्रतिष्ठा में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। इस श्रेणी में IIT Delhi 11 स्थान ऊपर चढ़कर दुनिया में 39वें स्थान पर पहुंच गया। यह इस बात का संकेत है कि उद्योग जगत संस्थान के छात्रों और स्नातकों को कितना सक्षम और रोजगार योग्य मानता है।

इसके अलावा Employment Outcomes श्रेणी में संस्थान ने 60 स्थान की शानदार छलांग लगाई है। यह पैरामीटर इस बात का आकलन करता है कि कोई विश्वविद्यालय अपने छात्रों को रोजगार, नेतृत्व और पेशेवर सफलता के लिए कितना तैयार करता है।

वहीं Citations per Faculty में 26 स्थान का सुधार यह दर्शाता है कि IIT Delhi में हो रहा शोध न केवल गुणवत्ता के लिहाज से मजबूत है, बल्कि उसका वैश्विक प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है।

चार वर्षों में 79 स्थान की ऐतिहासिक छलांग

IIT Delhi की यह उपलब्धि एक दिन में हासिल नहीं हुई है। पिछले चार वर्षों में संस्थान ने अपनी वैश्विक रैंकिंग में 79 स्थान का सुधार दर्ज किया है। वर्ष 2024 में जहां IIT Delhi 197वें स्थान पर था, वहीं अब 2027 में यह 118वें स्थान पर पहुंच गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम में सुधार, आधुनिक शोध सुविधाओं का विकास, उद्योगों के साथ मजबूत साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ने इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्थान ने पिछले कुछ वर्षों में विदेशी छात्रों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करने पर भी विशेष ध्यान दिया है।

IIT Delhi के Dean (Planning) एवं Ranking Cell के प्रमुख प्रो. सोमनाथ बैद्य रॉय ने इस उपलब्धि पर कहा कि संस्थान विश्वस्तरीय और किफायती तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के अपने मिशन के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास जताया कि नया पाठ्यक्रम, आधुनिक बुनियादी ढांचा और बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी भविष्य में संस्थान की स्थिति को और मजबूत बनाएगी।

विषयवार रैंकिंग में भी शानदार प्रदर्शन

QS World University Rankings by Subject 2026 में भी IIT Delhi ने शानदार प्रदर्शन किया था। संस्थान के कई विषय दुनिया के शीर्ष 50 विषयों में शामिल हुए थे। इनमें Electrical Engineering, Mechanical Engineering, Computer Science, Chemical Engineering और Civil Engineering जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं।

Engineering and Technology श्रेणी में IIT Delhi ने वैश्विक स्तर पर 36वीं रैंक हासिल की थी, जिससे यह भारत का शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान बना हुआ है।

वैश्विक मंच पर बढ़ रही भारतीय संस्थानों की मौजूदगी

QS World University Rankings 2027 में भारत के कुल 52 संस्थानों को स्थान मिला है। इनमें 33 सरकारी और 19 निजी या गैर-लाभकारी निजी संस्थान शामिल हैं। इस सूची में 13 भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भी शामिल हैं, जिनमें से आठ वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन करने में सफल रहे हैं।

यह उपलब्धि भारत द्वारा उच्च शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग पर किए जा रहे निवेश का परिणाम मानी जा रही है। नई शिक्षा नीति (NEP) और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों ने भी भारतीय संस्थानों की वैश्विक पहचान मजबूत करने में मदद की है।

QS World University Rankings 2027 में भारत के टॉप 10 संस्थान

1. IIT Delhi – 118

2. IIT Bombay – 134

3. IIT Madras – 170

4. IIT Kharagpur – 205

5. IISc Bengaluru – 221

6. IIT Kanpur – 222

7. University of Delhi – 323

8. IIT Roorkee – 335

9. IIT Guwahati – 350

10. Shoolini University – 454

कुछ संस्थानों ने लगाई छलांग, कुछ की रैंकिंग घटी

जहां कई भारतीय संस्थानों ने अपनी वैश्विक रैंकिंग में सुधार किया, वहीं कुछ विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में गिरावट भी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है और विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन अब केवल अकादमिक प्रतिष्ठा ही नहीं, बल्कि शोध गुणवत्ता, रोजगार क्षमता, अंतरराष्ट्रीय छात्रों और फैकल्टी की भागीदारी जैसे कई मानकों पर किया जाता है।

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